PM-MUDRA योजना 2026 तक ₹39 लाख करोड़ के ऋण बांटे
परिचय
भारतीय सरकार की एक प्रमुख योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM-MUDRA), जिसका उद्देश्य उद्यमिता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है, ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मार्च 2026 में दिए गए एक बयान के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक ₹39 लाख करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा योजना की व्यापक पहुंच और सूक्ष्म-उद्यमियों को ऋण सहायता प्रदान करने में इसकी सफलता को दर्शाता है। हालांकि, गैर-निष्पादित आस्तियों (NPAs) से जुड़ी चिंताएं भी इस योजना के सामने एक चुनौती बनी हुई हैं। JobSafal पर प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवारों के लिए यह जानकारी करंट अफेयर्स, सरकारी योजनाओं और भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह लेख PM-MUDRA योजना के प्रभाव, इसकी उपलब्धियों और चुनौतियों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए उपयोगी होगा।
मुख्य विवरण
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM-MUDRA), जिसे अप्रैल 2015 में लॉन्च किया गया था, गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु/सूक्ष्म उद्यमों को ₹10 लाख तक के संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्रदान करती है। मार्च 2026 तक, इस योजना के तहत कुल ₹39 लाख करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि इस योजना ने लाखों लोगों, विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। MUDRA ऋणों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
- शिशु (Shishu): ₹50,000 तक के ऋण।
- किशोर (Kishor): ₹50,000 से ₹5 लाख तक के ऋण।
- तरुण (Tarun): ₹5 लाख से ₹10 लाख तक के ऋण।
योजना का मुख्य लक्ष्य छोटे व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करके रोजगार सृजन और आय वृद्धि को बढ़ावा देना है। हालांकि, इस योजना के तहत गैर-निष्पादित आस्तियों (NPAs) का मुद्दा भी समय-समय पर चिंता का विषय रहा है। कुछ रिपोर्टों से पता चलता है कि MUDRA ऋणों का NPA अनुपात बैंकिंग क्षेत्र के औसत से अधिक हो सकता है, जिससे बैंकों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। सरकार और RBI इस चुनौती का समाधान करने के लिए लगातार उपाय कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
भारत में छोटे और सूक्ष्म उद्यम (MSMEs) अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जो बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करते हैं और आर्थिक विकास में योगदान करते हैं। हालांकि, इन उद्यमों को अक्सर औपचारिक बैंकिंग चैनलों से ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उनके पास संपार्श्विक की कमी होती है और वे पारंपरिक ऋण मानदंडों को पूरा नहीं कर पाते। इसी अंतर को पाटने के लिए PM-MUDRA योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना को Micro Units Development and Refinance Agency (MUDRA) Bank के माध्यम से लागू किया जाता है, जो वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs), सहकारी बैंकों, माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (MFIs) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) जैसे संस्थानों को पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है। योजना का उद्देश्य 'फंड द अनफंडेड' (Fund the Unfunded) के सिद्धांत पर काम करना है, जिससे छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने और अपनी आजीविका कमाने में मदद मिल सके। यह वित्तीय समावेशन की दिशा में सरकार के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य समाज के वंचित और अवित्तपोषित वर्गों तक बैंकिंग सेवाओं को पहुंचाना है।
प्रभाव और महत्व
PM-MUDRA योजना का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुआयामी प्रभाव पड़ा है। सबसे पहले, इसने लाखों नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने या अपने मौजूदा व्यवसायों का विस्तार करने में सक्षम बनाया है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है। महिलाओं और वंचित समुदायों को वित्तीय सहायता प्रदान करके, इसने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह योजना अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक बनाने में भी मदद करती है, जिससे छोटे व्यवसायों को बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने का अवसर मिलता है। हालांकि, NPAs का बढ़ता स्तर एक चिंता का विषय बना हुआ है। उच्च NPAs बैंकों के बही-खाते पर दबाव डाल सकते हैं और भविष्य में ऋण देने की उनकी क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार और नियामक निकायों के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि ऋण वितरण और वसूली की प्रक्रियाएं मजबूत हों ताकि योजना की दीर्घकालिक स्थिरता बनी रहे। यह योजना भारत को एक 'स्टार्टअप नेशन' और 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने के सरकार के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
परीक्षा के लिए महत्व
- UPSC: Prelims में PM-MUDRA योजना के उद्देश्य, इसकी श्रेणियां (शिशु, किशोर, तरुण), लॉन्च वर्ष और वित्तीय समावेशन से संबंधित प्रश्न आ सकते हैं। Mains में भारतीय अर्थव्यवस्था, उद्यमिता, वित्तीय समावेशन, NPAs और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
- SSC: General Awareness सेक्शन में PM-MUDRA योजना से संबंधित तथ्यात्मक प्रश्न, जैसे इसका पूरा नाम, लॉन्च की तारीख, और ऋण श्रेणियों की सीमाएं, पूछे जा सकते हैं। यह प्रतियोगी परीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी योजना है।
- Banking: IBPS/SBI PO जैसी परीक्षाओं में माइक्रोफाइनेंस, NPAs, वित्तीय समावेशन, और विभिन्न सरकारी ऋण योजनाओं से संबंधित प्रश्न आ सकते हैं। बैंकों द्वारा MUDRA ऋणों के वितरण और प्रबंधन से जुड़े प्रश्न भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- प्रश्न 1: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM-MUDRA) किस वर्ष शुरू की गई थी?
उत्तर: अप्रैल 2015 में। - प्रश्न 2: PM-MUDRA योजना के तहत अधिकतम कितनी राशि का ऋण दिया जा सकता है?
उत्तर: ₹10 लाख तक। - प्रश्न 3: 'शिशु' श्रेणी के तहत कितने रुपये तक के ऋण दिए जाते हैं?
उत्तर: ₹50,000 तक।
याद रखने योग्य तथ्य
- योजना का नाम: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM-MUDRA)
- लॉन्च वर्ष: अप्रैल 2015
- मार्च 2026 तक स्वीकृत ऋण: ₹39 लाख करोड़ से अधिक
- ऋण की श्रेणियां: शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹5 लाख तक), तरुण (₹10 लाख तक)
- प्रमुख चुनौती: गैर-निष्पादित आस्तियां (NPAs)
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