भारत की प्लास्टिक पैकेजिंग चुनौती और नीति 2026
परिचय
भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि और बढ़ते उपभोक्ता बाजार के कारण प्लास्टिक पैकेजिंग के उपयोग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। जहां एक ओर यह सुविधा और लागत-प्रभावशीलता प्रदान करता है, वहीं 2026 में यह 'बूम' अब एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय 'संकट' में बदल गया है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए गंभीर चुनौतियां पेश कर रहा है। प्लास्टिक अपशिष्ट का बढ़ता ढेर न केवल शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि मिट्टी, जल और वायु को भी दूषित कर रहा है। इस चुनौती का सामना करने के लिए, भारत सरकार सक्रिय रूप से नई नीतियों और उपायों पर काम कर रही है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए, यह विषय करंट अफेयर्स, पर्यावरण और शासन के खंड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित है।
मुख्य विवरण
2026 तक, भारत में प्लास्टिक पैकेजिंग का वार्षिक उत्पादन और खपत कई मिलियन टन तक पहुंच गई है। इस प्लास्टिक का एक बड़ा हिस्सा सिंगल-यूज प्लास्टिक (Single-Use Plastic - SUP) है, जिसे एक बार उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है। इस अपशिष्ट का अनुचित निपटान जलमार्गों को अवरुद्ध करता है, समुद्री जीवन को नुकसान पहुंचाता है और माइक्रोप्लास्टिक के रूप में खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करता है। भारत सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (संशोधित 2021, 2022) जैसे कानूनों के माध्यम से इस पर अंकुश लगाने का प्रयास किया है। 2026 में, विशेष रूप से Extended Producer Responsibility (EPR) पर अधिक जोर दिया जा रहा है। EPR नीति निर्माताओं को उनके उत्पादों के पूरे जीवन चक्र - निर्माण से लेकर निपटान तक - के लिए जिम्मेदारी ठहराती है। इसका अर्थ है कि कंपनियों को अपने द्वारा बाजार में लाए गए प्लास्टिक को वापस इकट्ठा करने और रीसाइक्लिंग या उचित निपटान सुनिश्चित करने के लिए एक प्रणाली विकसित करनी होगी। सरकार ने प्लास्टिक के वैकल्पिक सामग्रियों के अनुसंधान और विकास को भी बढ़ावा दिया है और रीसाइक्लिंग बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया है। ये उपाय सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों के लिए पर्यावरण नीति और सतत विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
भारत में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ी है, जो शहरीकरण, उपभोक्तावाद और अपर्याप्त अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों का परिणाम है। स्वच्छ भारत अभियान ने हालांकि स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, लेकिन प्लास्टिक की चुनौती अभी भी बनी हुई है। 2019 में, भारत ने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया था, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर भी, प्लास्टिक प्रदूषण एक बड़ी चिंता का विषय है, और भारत अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा, जहां संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाता है और अपशिष्ट को कम किया जाता है, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण बन गई है। भारत इन वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और अपनी विशिष्ट चुनौतियों के अनुरूप समाधान विकसित करने का प्रयास कर रहा है।
प्रभाव और महत्व
प्लास्टिक पैकेजिंग चुनौती का समाधान करना भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा और जैव विविधता की रक्षा होगी। दूसरा, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करेगा, क्योंकि प्लास्टिक प्रदूषण से जुड़े रोगों का जोखिम कम होगा। तीसरा, यह अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में आर्थिक अवसर पैदा करेगा, जैसे रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट से ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश। चौथा, EPR जैसी नीतियां कंपनियों को अधिक टिकाऊ पैकेजिंग समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेंगी, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। अंततः, यह भारत की वैश्विक छवि को एक जिम्मेदार और पर्यावरण के प्रति जागरूक राष्ट्र के रूप में मजबूत करेगा। यह प्रयास भारत के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
परीक्षा के लिए महत्व
- UPSC: Prelims में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, EPR, सिंगल-यूज प्लास्टिक और पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित प्रश्न आ सकते हैं। Mains में GS-III (पर्यावरण और पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन), GS-II (शासन, नीति निर्माण, सतत विकास) के तहत अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और सरकारी पहलों पर चर्चा के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है।
- SSC: General Awareness सेक्शन में पर्यावरण विज्ञान, प्रदूषण के प्रकार, सरकारी योजनाएं (स्वच्छ भारत अभियान) और प्लास्टिक अपशिष्ट से संबंधित सीधे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
- State PSC: स्थानीय पर्यावरण मुद्दों, राज्य सरकारों द्वारा प्लास्टिक नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम और अपशिष्ट प्रबंधन नीतियों पर आधारित प्रश्न आ सकते हैं।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- प्रश्न 1 — भारत में प्लास्टिक पैकेजिंग से उत्पन्न प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियां क्या हैं?
- प्रश्न 2 — Extended Producer Responsibility (EPR) क्या है और यह प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में कैसे मदद करता है?
- प्रश्न 3 — प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख नीतिगत कदम क्या हैं?
याद रखने योग्य तथ्य
- प्लास्टिक पैकेजिंग भारत में एक बड़ा पर्यावरणीय संकट बन गई है।
- सरकार ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू किए हैं।
- Extended Producer Responsibility (EPR) प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन की एक प्रमुख नीति है।
- सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास जारी हैं।
- सर्कुलर इकोनॉमी प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने का एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण है।
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