भारत के जलवायु लक्ष्य: अपडेटेड NDCs और नेट-ज़ीरो 2026

परिचय

08 अप्रैल 2026 को, भारत वैश्विक जलवायु कार्रवाई के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हुए, पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) को अद्यतन करना जारी रखे हुए है। ये संशोधित प्रतिज्ञाएँ जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा को दर्शाती हैं, जबकि साथ ही साथ सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को भी संबोधित करती हैं। यह महत्वपूर्ण कदम भारत की जिम्मेदारी की भावना और वैश्विक समुदाय के साथ मिलकर काम करने की इच्छा को रेखांकित करता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभाव दुनिया भर में महसूस किए जा रहे हैं। भारत के ये अपडेटेड लक्ष्य न केवल घरेलू स्तर पर हरित प्रौद्योगिकियों और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए भारत की मांग को मजबूत करेंगे। यह विषय प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए करंट अफेयर्स, पर्यावरण और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की वैश्विक नेतृत्व की भूमिका और भविष्य की पर्यावरणीय नीतियों को दर्शाता है।

मुख्य विवरण

भारत ने 2026 में अपने अद्यतन NDCs के माध्यम से कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जो 2015 में घोषित मूल प्रतिज्ञाओं से कहीं अधिक हैं। ये लक्ष्य भारत के प्रधान मंत्री द्वारा COP26 (2021) में घोषित 'पंचामृत' लक्ष्यों पर आधारित हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • वर्ष 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट (GW) तक बढ़ाना।
  • वर्ष 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करना।
  • वर्ष 2030 तक कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन को 1 बिलियन टन कम करना।
  • वर्ष 2030 तक अपनी अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता को 45% से अधिक कम करना (2005 के स्तर से)।
  • वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करना।

ये लक्ष्य भारत की अर्थव्यवस्था के डीकार्बोनाइजेशन (decarbonization) की दिशा में एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करते हैं। सरकार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में भारी निवेश कर रही है। भारत का ग्रीन हाइड्रोजन मिशन विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का एक वैश्विक केंद्र बनाना है। इन प्रयासों से न केवल उत्सर्जन कम होगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा भी बढ़ेगी और नई सरकारी नौकरी के अवसर भी पैदा होंगे। ये पहलें करंट अफेयर्स के रूप में प्रतियोगी परीक्षा के उम्मीदवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भारत की जलवायु कार्रवाई की प्रतिबद्धता का पता पेरिस समझौते (2015) से लगाया जा सकता है, जहाँ देशों ने वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2°C से नीचे, और अधिमानतः 1.5°C तक सीमित करने के लिए NDCs प्रस्तुत किए थे। भारत, एक विकासशील देश के रूप में, हमेशा 'जलवायु न्याय' के सिद्धांत का समर्थक रहा है, जिसमें विकसित देशों से उनके ऐतिहासिक उत्सर्जन के लिए अधिक जिम्मेदारी लेने और विकासशील देशों को जलवायु कार्रवाई के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने का आह्वान किया गया है।

भारत ने 2015 में अपने पहले NDCs प्रस्तुत किए थे, जिसमें 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 33-35% की कमी और गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा क्षमता में 40% की हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा गया था। COP26 ग्लासगो (2021) में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इन लक्ष्यों को 'पंचामृत' के रूप में और अधिक महत्वाकांक्षी बनाया, जिसमें 2070 तक नेट-ज़ीरो का लक्ष्य भी शामिल था। यह भारत के आर्थिक विकास की गति को बनाए रखते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने की उसकी क्षमता और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकसित देशों से जलवायु वित्त के लिए अपने 100 बिलियन डॉलर के वादे को पूरा करने का आग्रह करता रहा है, ताकि विकासशील देश अपनी जलवायु महत्वाकांक्षाओं को साकार कर सकें।

प्रभाव और महत्व

भारत के अद्यतन NDCs और नेट-ज़ीरो लक्ष्य के कई दूरगामी प्रभाव और महत्व हैं:

  • वैश्विक जलवायु कार्रवाई में नेतृत्व: भारत एक प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्था के रूप में, वैश्विक जलवायु कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है, जो अन्य देशों को भी अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
  • आर्थिक परिवर्तन: इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश और हरित प्रौद्योगिकियों के विकास की आवश्यकता होगी, जिससे अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन आएंगे और नए उद्योग व सरकारी नौकरी के अवसर पैदा होंगे।
  • ऊर्जा सुरक्षा: नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर जीवाश्म ईंधन के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करेगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और वैश्विक ऊर्जा कीमतों के झटकों के प्रति संवेदनशीलता कम होगी।
  • पर्यावरणीय लाभ: उत्सर्जन में कमी से वायु प्रदूषण कम होगा, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा और पारिस्थितिक तंत्र को लाभ होगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंध: जलवायु कार्रवाई में भारत की प्रतिबद्धता अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को मजबूत करती है, विशेष रूप से जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में।

यह पहल भारत को सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ाती है और प्रतियोगी परीक्षा के उम्मीदवारों के लिए देश की भविष्य की दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

परीक्षा के लिए महत्व

  • UPSC: Prelims में पर्यावरण और पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन, NDCs, COP सम्मेलन), अंतर्राष्ट्रीय संबंध (पेरिस समझौता, जलवायु न्याय), सरकारी योजनाएं (ग्रीन हाइड्रोजन मिशन) से संबंधित प्रश्न आ सकते हैं। Mains में GS-III (पर्यावरण और पारिस्थितिकी, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी) और GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के तहत विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  • SSC: General Awareness सेक्शन में पर्यावरण (जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण सम्मेलन), करंट अफेयर्स (भारत के नए जलवायु लक्ष्य, नेट-ज़ीरो वर्ष) से संबंधित सीधे प्रश्न आ सकते हैं।
  • Banking: IBPS/SBI PO और क्लर्क परीक्षाओं में अर्थव्यवस्था (हरित वित्तपोषण, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश), करंट अफेयर्स (सरकारी नीतियां, अंतरराष्ट्रीय समझौते) से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  • प्रश्न 1 — भारत ने किस वर्ष तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है?
    उत्तर — भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • प्रश्न 2 — NDCs का पूर्ण रूप क्या है और यह किस अंतरराष्ट्रीय समझौते से संबंधित है?
    उत्तर — NDCs का पूर्ण रूप राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions) है और यह पेरिस समझौते से संबंधित है।
  • प्रश्न 3 — COP26 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 'पंचामृत' लक्ष्यों में से कोई दो लक्ष्य बताएं।
    उत्तर — 'पंचामृत' लक्ष्यों में से दो हैं: वर्ष 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक बढ़ाना और वर्ष 2030 तक कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन को 1 बिलियन टन कम करना।

याद रखने योग्य तथ्य

  • भारत का नेट-ज़ीरो लक्ष्य वर्ष 2070 तक है।
  • NDCs का संबंध पेरिस समझौते से है।
  • भारत ने 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
  • COP26 ग्लासगो में 'पंचामृत' लक्ष्यों की घोषणा की गई थी।

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